Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.30: अनन्य परमात्मा से सम्बन्ध स्थापित करने से मनुष्य समत्व को प्राप्त होता है, अर्थात् अनन्य परमात्मा को प्राप्त होता है। स्वतन्त्र परमात्मा से सम्बन्ध स्थापित होने से वह सच्चा स्वतन्त्र हो जाता है और वास्तविक मुक्ति को प्राप्त होता है। 30॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केवलात्मा तथा चैव केवलेन समेत्य वै।
स्वतन्त्रश्च स्वतन्त्रेण स्वतन्त्रत्वमवाप्नुते॥ ३०॥
अनुवाद
अनन्य परमात्मा से सम्बन्ध स्थापित करने से मनुष्य समत्व को प्राप्त होता है, अर्थात् अनन्य परमात्मा को प्राप्त होता है। स्वतन्त्र परमात्मा से सम्बन्ध स्थापित होने से वह सच्चा स्वतन्त्र हो जाता है और वास्तविक मुक्ति को प्राप्त होता है। 30॥
By establishing a relationship with the unique God, one attains the sameness, that is, one attains the unique God. Due to his relationship with the independent God, he becomes truly independent and attains real freedom. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥