Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.308.21-22: हे निष्पाप राजन! इस प्रकार मैंने तुम्हारे समक्ष अप्रतिबुद्ध (क्षर), बुध्यमान (अक्षर जीवात्मा) और बुद्ध (ज्ञानस्वरूप ईश्वर) - इन तीनों को श्रुति के निर्देशानुसार यथावत् प्रस्तुत किया है। शास्त्रीय दृष्टि से आत्मा की अनेकता और एकता को इसी प्रकार समझना चाहिए। 21-22॥   |   mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  12.308.21-22 
एष ह्यप्रतिबुद्धश्च बुध्यमानश्च तेऽनघ॥ २१॥
प्रोक्तो बुद्धश्च तत्त्वेन यथाश्रुतिनिदर्शनात्।
नानात्वैकत्वमेतावद् द्रष्टव्यं शास्त्रदर्शनात्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजन! इस प्रकार मैंने तुम्हारे समक्ष अप्रतिबुद्ध (क्षर), बुध्यमान (अक्षर जीवात्मा) और बुद्ध (ज्ञानस्वरूप ईश्वर) - इन तीनों को श्रुति के निर्देशानुसार यथावत् प्रस्तुत किया है। शास्त्रीय दृष्टि से आत्मा की अनेकता और एकता को इसी प्रकार समझना चाहिए। 21-22॥
 
Sinless king! In this way, I have presented to you Apratibuddha (Kshar), Budhyaman (Akshar Jivatma) and Buddha (God in the form of knowledge) – all three of them have been presented accurately as per the directions of Shruti. According to the classical view, the diversity and unity of the soul should be understood in this way. 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)