Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.1: वशिष्ठजी कहते हैं - राजन! अब बुद्ध (परमेश्वर), अबुद्ध (आत्मा) और इस पुण्य सृष्टि (प्रकृत प्रपंच) का वर्णन सुनो। जीवात्मा अनेक रूपों में प्रकट होता है और उन रूपों को सत्य रूप में देखता रहता है। 1॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वशिष्ठजी कहते हैं - राजन! अब बुद्ध (परमेश्वर), अबुद्ध (आत्मा) और इस पुण्य सृष्टि (प्रकृत प्रपंच) का वर्णन सुनो। जीवात्मा अनेक रूपों में प्रकट होता है और उन रूपों को सत्य रूप में देखता रहता है। 1॥
Vashishthaji says – King! Now listen to the description of Buddha (God), Abuddha (soul) and this virtuous creation (Prakrit Prapancha). The living soul manifests itself in many forms and keeps seeing those forms as truth. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥