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mahabharat 12.306.50: सर्व' अव्यक्त प्रकृति का नाम है और उससे भिन्न भगवान का पच्चीसवाँ तत्त्व आसर्व कहलाता है। जो लोग उसे इस प्रकार जानते हैं, उन्हें आवागमन का भय नहीं रहता ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  12.306.50 
सर्वमव्यक्तमित्युक्तमसर्व: पञ्चविंशक:।
य एनमभिजानन्ति न भयं तेषु विद्यते॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
सर्व' अव्यक्त प्रकृति का नाम है और उससे भिन्न भगवान का पच्चीसवाँ तत्त्व आसर्व कहलाता है। जो लोग उसे इस प्रकार जानते हैं, उन्हें आवागमन का भय नहीं रहता ॥50॥
 
'Sarv' is the name of the unmanifested nature and the twenty-fifth element of God, different from it, is called Asarv. Those who know Him in this manner, do not have the fear of transmigration. ॥ 50॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वसिष्ठकरालजनकसंवादे षडधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें वसिष्ठ और करालजनकका संवादविषयक तीन सौ छठा अध्याय पूरा हुआ॥ ३०६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)