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mahabharat 12.306.43: सांख्य विद्वान् मनुष्य प्रकृति सहित चौबीस तत्त्वों की गणना करके जड़ तत्त्वों से भिन्न पच्चीसवाँ तत्त्व परमात्मा को निर्धारित करते हैं ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.306.43 
तत्त्वानि च चतुर्विंशत् परिसंख्याय तत्त्वत:।
सांख्या: सह प्रकृत्या तु निस्तत्त्व: पञ्चविंशक:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
सांख्य विद्वान् मनुष्य प्रकृति सहित चौबीस तत्त्वों की गणना करके जड़ तत्त्वों से भिन्न पच्चीसवाँ तत्त्व परमात्मा को निर्धारित करते हैं ॥43॥
 
Sankhya scholars, after enumerating twenty-four elements including human nature, determine the Supreme Being as the twenty-fifth different from the inanimate elements. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)