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सांख्यदर्शनमेतावत् परिसंख्यानुदर्शनम्।
सांख्या: प्रकुर्वते चैव प्रकृतिं च प्रचक्षते॥ ४२॥
अनुवाद
बस इतना ही सांख्यदर्शन है। सांख्य के विद्वान तत्वों की संख्या गिनते हैं और प्रकृति को जगत का कारण बताते हैं। इसीलिए इस दर्शन का नाम सांख्यदर्शन है।
This much is Sankhyadarshan. The scholars of Sankhya count the number of elements and call nature the cause of the world. That is why the name of this philosophy is Sankhyadarshan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥