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mahabharat 12.306.30: जो विद्वान् पुरुष सांख्य के विधि-सिद्धान्तों के ज्ञाता हैं और सदैव सांख्य मार्ग का अनुसरण करते हैं, वे सांख्य के अनुसार तत्त्वों की उतनी ही संख्या बताते हैं। सांख्यशास्त्र के विद्वानों ने अव्यक्त, महातत्त्व, अहंकार और पंचतन्मात्र इन आठ प्रकृतियों सहित उपर्युक्त सोलह विकारों को स्वीकार किया है। कुल चौबीस तत्त्व सांख्यशास्त्र के विद्वानों ने स्वीकार किए हैं। 30॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.306.30 
एतावदेव तत्त्वानां सांख्यमाहुर्मनीषिण:।
सांख्ये विधिविधानज्ञा नित्यं सांख्यपथे रता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जो विद्वान् पुरुष सांख्य के विधि-सिद्धान्तों के ज्ञाता हैं और सदैव सांख्य मार्ग का अनुसरण करते हैं, वे सांख्य के अनुसार तत्त्वों की उतनी ही संख्या बताते हैं। सांख्यशास्त्र के विद्वानों ने अव्यक्त, महातत्त्व, अहंकार और पंचतन्मात्र इन आठ प्रकृतियों सहित उपर्युक्त सोलह विकारों को स्वीकार किया है। कुल चौबीस तत्त्व सांख्यशास्त्र के विद्वानों ने स्वीकार किए हैं। 30॥
 
The wise men who are knowledgeable about Sankhya's legal principles and always follow the Sankhya path, tell the same number of elements as per Sankhya. The scholars of Sankhyashastra have accepted the above mentioned sixteen vices including these eight natures namely Avyakta, Mahatattva, Ahamkara and Panchatanamatra. A total of twenty-four elements have been accepted by the scholars of Sankhyashastra. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)