Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.306.29: ये आठ प्रकृतियाँ हैं। इनसे सोलह तत्त्व उत्पन्न होते हैं, जिन्हें विकार कहते हैं। पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, एक मन और पाँच भौतिक तत्त्व - ये सोलह विकार हैं। इनमें आकाश आदि पाँच तत्त्व और पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ विशेष कहलाती हैं। 29॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.306.29 
एता: प्रकृतयश्चाष्टौ विकाराश्चापि षोडश।
पञ्च चैव विशेषा वै तथा पञ्चेन्द्रियाणि च॥ २९॥
 
 
अनुवाद
ये आठ प्रकृतियाँ हैं। इनसे सोलह तत्त्व उत्पन्न होते हैं, जिन्हें विकार कहते हैं। पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, एक मन और पाँच भौतिक तत्त्व - ये सोलह विकार हैं। इनमें आकाश आदि पाँच तत्त्व और पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ विशेष कहलाती हैं। 29॥
 
These are the eight natures. From these arise sixteen elements, which are called disorders. Five senses of knowledge, five senses of action, one mind and five physical elements – these are sixteen vices. Of these, five elements like sky and five sense organs are called special. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)