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mahabharat 12.306.19: योगीजन योगकाल में साक्षात्कार करके उसी परमात्मा को देख सकते हैं, और यह बात मनुष्य के कहने की शक्ति से परे है। हे बालक! मेरे जैसे मनुष्यों के लिए उचित है कि हम उस अन्तरात्मा का ज्ञान प्राप्त करें, जो सबका ज्ञाता है और हमारे हृदय में निवास करता है।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.306.19 
तदा तमनुपश्येत यस्मिन् दृष्टे न कथ्यते।
हृदयस्थोऽन्तरात्मेति ज्ञेयो ज्ञस्तात मद्विधै:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
योगीजन योगकाल में साक्षात्कार करके उसी परमात्मा को देख सकते हैं, और यह बात मनुष्य के कहने की शक्ति से परे है। हे बालक! मेरे जैसे मनुष्यों के लिए उचित है कि हम उस अन्तरात्मा का ज्ञान प्राप्त करें, जो सबका ज्ञाता है और हमारे हृदय में निवास करता है।॥19॥
 
A yogi can see that very God in the Yoga period after having had His vision, and this is beyond the ability of a person to say anything. My child! It is appropriate for people like me to acquire the knowledge of the inner soul, which is the knower of all and resides in our hearts.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)