Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.306.13: योगी को चाहिए कि वह सब प्रकार की आसक्तियों से मुक्त हो, संयम से भोजन करे और अपनी इन्द्रियों को वश में रखे। रात्रि के प्रथम और अंतिम प्रहर में उसे अपने मन को आत्मा में एकाग्र करना चाहिए। ॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योगी को चाहिए कि वह सब प्रकार की आसक्तियों से मुक्त हो, संयम से भोजन करे और अपनी इन्द्रियों को वश में रखे। रात्रि के प्रथम और अंतिम प्रहर में उसे अपने मन को आत्मा में एकाग्र करना चाहिए। ॥13॥
The yogi should be free from all types of attachments, should eat in moderation and control his senses. He should concentrate his mind on the Self during the first and last part of the night. ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥