Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.306.1: जनक ने पूछा - हे महामुनि! आपने क्षर को अनेक रूप वाला और अक्षर को एक बताया है; फिर भी मैं दोनों के तत्त्व के विषय में किए गए निर्णय को संदेह की दृष्टि से देखता हूँ॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.306: योग और सांख्यके स्वरूपका वर्णन तथा आत्मज्ञानसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनक उवाच
नानात्वैकत्वमित्युक्तं त्वयैतदृषिसत्तम।
पश्याम्येतद्धि संदिग्धमेतयोर्वै निदर्शनम्॥ १॥
अनुवाद
जनक ने पूछा - हे महामुनि! आपने क्षर को अनेक रूप वाला और अक्षर को एक बताया है; फिर भी मैं दोनों के तत्त्व के विषय में किए गए निर्णय को संदेह की दृष्टि से देखता हूँ॥1॥
Janaka asked - O great sage! You have described the kshar as having many forms and the akshar as one; but I still view the decision made about the essence of both with a doubtful eye.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥