| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर » श्लोक 20 |
|
| | | | श्लोक 12.305.20  | त्वङ्मांसं रुधिरं मेद: पित्तं मज्जा च स्नायु च।
अथ चैन्द्रियकं तात तद् भवानिदमाह माम्॥ २०॥ | | | | | | अनुवाद | | तात! आपने मुझसे कहा है कि शरीर में त्वचा, मांस, रक्त, मेद, पित्त, मज्जा, नाड़ियाँ और इन्द्रियाँ (ये सब माता-पिता के सम्बन्ध से प्रकट हुई हैं)॥20॥ | | | | Tat! You have told me that the skin, flesh, blood, fat, bile, marrow, nerves and senses in the body (all of them have appeared from the relationship with the parents). 20॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|