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श्लोक 12.305.2  |
ऋते तु पुरुषं नेह स्त्री गर्भं धारयत्युत।
ऋते स्त्रियं न पुरुषो रूपं निर्वर्तयेत् तथा॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| इस संसार में न तो स्त्री पुरुष के बिना गर्भ धारण कर सकती है और न ही पुरुष स्त्री के बिना शरीर को जन्म दे सकता है॥2॥ |
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| In this world neither can a woman conceive without a man nor can a man give birth to a body without a woman.॥ 2॥ |
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