श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.305.2 
ऋते तु पुरुषं नेह स्त्री गर्भं धारयत्युत।
ऋते स्त्रियं न पुरुषो रूपं निर्वर्तयेत् तथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में न तो स्त्री पुरुष के बिना गर्भ धारण कर सकती है और न ही पुरुष स्त्री के बिना शरीर को जन्म दे सकता है॥2॥
 
In this world neither can a woman conceive without a man nor can a man give birth to a body without a woman.॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd