श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 305: क्षर-अक्षर एवं प्रकृति-पुरुषके विषयमें राजा जनककी शंका और उसका वसिष्ठजीद्वारा उत्तर  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.305.11 
वसिष्ठ उवाच
यदेतदुक्तं भवता वेदशास्त्रनिदर्शनम्।
एवमेतद् यथा चैतन्निगृह्णाति तथा भवान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठजी बोले, "हे राजन! आपने वेद और शास्त्रों का उदाहरण देकर जो कुछ कहा है, वह सत्य है। आप इसे जैसा समझते हैं, वैसा ही सत्य है।" ॥11॥
 
Vasishtha said, "O King! Whatever you have said citing the examples of Vedas and scriptures is correct. It is true as you understand it." ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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