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श्लोक 12.305.1  |
जनक उवाच
अक्षरक्षरयोरेष द्वयो: सम्बन्ध इष्यते।
स्त्रीपुंसोर्वापि भगवन् सम्बन्धस्तद्वदुच्यते॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| राजा जनक बोले - प्रभु ! क्षर और अक्षर (प्रकृति और पुरुष) का यह सम्बन्ध स्त्री-पुरुष के वैवाहिक सम्बन्ध के समान ही माना गया है ॥1॥ |
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| King Janak said – Lord! This relationship between Kshar and Akshar (nature and man) is considered to be the same as the marital relationship between man and woman. 1॥ |
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