जनक उवाच
अक्षरक्षरयोरेष द्वयो: सम्बन्ध इष्यते।
स्त्रीपुंसोर्वापि भगवन् सम्बन्धस्तद्वदुच्यते॥ १॥
अनुवाद
राजा जनक बोले - प्रभु ! क्षर और अक्षर (प्रकृति और पुरुष) का यह सम्बन्ध स्त्री-पुरुष के वैवाहिक सम्बन्ध के समान ही माना गया है ॥1॥
King Janak said – Lord! This relationship between Kshar and Akshar (nature and man) is considered to be the same as the marital relationship between man and woman. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥