श्रेष्ठ! इसी प्रकार यह समझना चाहिए कि ज्ञानी पुरुष की संगति से मूर्ख भी ज्ञानी हो जाता है। त्रिगुणात्मिका प्रकृति के साथ संबंध होने से निर्गुण जीव भी त्रिगुण जीव के समान हो जाता है। 11॥
The best! Similarly, it should be understood that even a fool becomes wise by associating with a wise person. Due to the connection with the Trigunatmika nature, even the Nirguna soul becomes like a Triguna soul. 11॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वसिष्ठकरालजनकसंवादे चतुरधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें वसिष्ठ और करालजनकका संवादविषयक तीन सौ चारवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥