Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.304.1: वसिष्ठजी कहते हैं: हे राजन! अज्ञान के कारण अज्ञानी पुरुषों की संगति करने से जीव निरंतर अधोगति को प्राप्त होता है और उसे हजारों बार जन्म लेना पड़ता है।   |   mahabharat अध्याय 12.304: प्रकृतिके संसर्गदोषसे जीवका पतन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 304: प्रकृतिके संसर्गदोषसे जीवका पतन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.304.1 
वसिष्ठ उवाच
एवमप्रतिबुद्धत्वादबुद्धजनसेवनात्।
सर्गकोटि सहस्राणि पतनान्तानि गच्छति॥ १॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठजी कहते हैं: हे राजन! अज्ञान के कारण अज्ञानी पुरुषों की संगति करने से जीव निरंतर अधोगति को प्राप्त होता है और उसे हजारों बार जन्म लेना पड़ता है।
 
Vasishtha says: O King! Due to ignorance, by associating with ignorant persons, a living being continuously degrades and has to take births thousands of times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)