Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.303.49: इस संसार में पाँचों श्रवणेन्द्रियाँ और पाँचों वाणीकर्मेन्द्रियाँ अपने-अपने गुणों सहित पुण्य शरीरों में स्थित हैं ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.303.49 
श्रोत्रादीनि तु सर्वाणि पञ्चकर्मेन्द्रियाण्यथ।
वागादीनि प्रवर्तन्ते गुणेष्विह गुणै: सह॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में पाँचों श्रवणेन्द्रियाँ और पाँचों वाणीकर्मेन्द्रियाँ अपने-अपने गुणों सहित पुण्य शरीरों में स्थित हैं ॥49॥
 
In this world, the five sense organs like hearing and the five action senses like speech are located in virtuous bodies with their respective qualities. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)