Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.303.4: जैसे रेशम का कीड़ा अपने द्वारा उत्पन्न तंतुओं से अपने को सब ओर से बाँध लेता है, वैसे ही निर्गुण आत्मा भी अपने द्वारा प्रकट किए गए स्वाभाविक गुणों से बंध जाता है ॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे रेशम का कीड़ा अपने द्वारा उत्पन्न तंतुओं से अपने को सब ओर से बाँध लेता है, वैसे ही निर्गुण आत्मा भी अपने द्वारा प्रकट किए गए स्वाभाविक गुणों से बंध जाता है ॥4॥
Just as the silkworm binds itself on all sides with the filaments it has produced itself, so too the attributeless Self gets bound by the natural qualities it has manifested itself. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥