Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.303.30: वह कभी जन्म लेता है, कभी मरता है और कभी वाद-विवाद और झगड़ों में उलझा रहता है। विद्वान पुरुष कहते हैं कि ये सब शुभ और अशुभ कर्म-मार्ग हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.303.30 
जन्ममृत्युविवादे च तथा विशसनेऽपि च।
शुभाशुभमयं सर्वमेतदाहु: क्रियापथम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वह कभी जन्म लेता है, कभी मरता है और कभी वाद-विवाद और झगड़ों में उलझा रहता है। विद्वान पुरुष कहते हैं कि ये सब शुभ और अशुभ कर्म-मार्ग हैं ॥30॥
 
Sometimes he is born, sometimes he dies and sometimes he is involved in arguments and fights. Learned men say that all these are auspicious and inauspicious paths of action. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)