Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.303.21: कभी वह विधिपूर्वक चान्द्रायण व्रत का पालन करता है और अनेक प्रकार के धार्मिक चिह्न धारण करता है। कभी वह चारों आश्रमों के मार्ग पर चलता है और कभी विपरीत मार्ग अपनाता है ॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कभी वह विधिपूर्वक चान्द्रायण व्रत का पालन करता है और अनेक प्रकार के धार्मिक चिह्न धारण करता है। कभी वह चारों आश्रमों के मार्ग पर चलता है और कभी विपरीत मार्ग अपनाता है ॥21॥
Sometimes he performs the Chandrayan fast according to the prescribed rules and wears many types of religious symbols. Sometimes he walks on the path of the four ashramas and sometimes he takes the opposite path. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥