Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.303.17: कभी-कभी वह छह रातों के बाद भोजन करता है और कभी-कभी वह सात, आठ, दस या बारह दिनों के बाद भोजन करता है।   |   mahabharat अध्याय 12.303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 303: प्रकृति-संसर्गके कारण जीवका अपनेको नाना प्रकारके कर्मोंका कर्ता और भोक्ता मानना एवं नाना योनियोंमें बारंबार जन्म ग्रहण करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.303.17 
षड्रात्रभोजनश्चैव तथैवाष्टहभोजन:।
सप्तरात्रदशाहारो द्वादशाहिकभोजन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वह छह रातों के बाद भोजन करता है और कभी-कभी वह सात, आठ, दस या बारह दिनों के बाद भोजन करता है।
 
Sometimes he eats after six nights and sometimes he takes food after seven, eight, ten or twelve days. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)