श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 302: वसिष्ठ और करालजनकका संवाद—क्षर और अक्षरतत्त्वका निरूपण और इनके ज्ञानसे मुक्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.302.11 
भगवन् श्रोतुमिच्छामि परं ब्रह्म सनातनम्।
यस्मान्न पुनरावृत्तिमाप्नुवन्ति मनीषिण:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैं उस सनातन परब्रह्म के स्वरूप का वर्णन सुनना चाहता हूँ, जहाँ से बुद्धिमान् पुरुष पुनः इस संसार में नहीं लौटते॥ 11॥
 
'O Lord! I wish to hear the description of the nature of that eternal Supreme Being from where wise men do not return to this world again.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)