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mahabharat 12.301.91: इसमें कोई संदेह नहीं कि स्वप्नावस्था में जीवात्मा अपने-अपने स्थानों में स्थित समस्त इन्द्रियों की गतियों को प्रभावित करके सूक्ष्म विषयों में विचरण करता है ॥91॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  12.301.91 
इन्द्रियाणां तु सर्वेषां स्वस्थानेष्वेव सर्वश:।
आक्रम्य गतय: सूक्ष्माश्चरत्यात्मा न संशय:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि स्वप्नावस्था में जीवात्मा अपने-अपने स्थानों में स्थित समस्त इन्द्रियों की गतियों को प्रभावित करके सूक्ष्म विषयों में विचरण करता है ॥91॥
 
There is no doubt that in dream state the soul wanders in subtle objects by affecting the movements of all the senses situated in their respective places. ॥91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)