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mahabharat 12.301.114: सांख्य का ज्ञान अत्यन्त विशाल और प्राचीन है। यह समुद्र के समान गम्भीर, पवित्र, उदार भावनाओं से युक्त और अत्यन्त सुन्दर है। नरनाथ! इस सम्पूर्ण अविनाशी ज्ञान को पूर्णतया परमेश्वर भगवान नारायण ही धारण करते हैं। 114॥   |   mahabharat अध्याय 12.301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 301: सांख्ययोगके अनुसार साधन और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  12.301.114 
सांख्यं विशालं परमं पुराणं
महार्णवं विमलमुदारकान्तम्।
कृत्स्नं च सांख्यं नृपते महात्मा
नारायणो धारयतेऽप्रमेयम्॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
सांख्य का ज्ञान अत्यन्त विशाल और प्राचीन है। यह समुद्र के समान गम्भीर, पवित्र, उदार भावनाओं से युक्त और अत्यन्त सुन्दर है। नरनाथ! इस सम्पूर्ण अविनाशी ज्ञान को पूर्णतया परमेश्वर भगवान नारायण ही धारण करते हैं। 114॥
 
The knowledge of Sankhya is very vast and very ancient. It is as deep as the ocean, pure, full of generous feelings and very beautiful. Narnath! Supreme God Lord Narayana fully possesses this entire irreducible knowledge of knowledge. 114॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)