श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.300.44 
भुञ्जानो यावकं रूक्षं दीर्घकालमरिंदम।
एकाहारो विशुद्धात्मा योगी बलमवाप्नुयात्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुराज! जो योगी दीर्घकाल तक प्रतिदिन एक बार जौ का सूखा दलिया खाता है, वह शुद्ध मन से योगशक्ति प्राप्त कर लेता है ॥ 44॥
 
O King of enemies! A yogi who eats dry barley porridge once a day for a long time can attain yogic power with a pure mind. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)