श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.300.38 
प्रवेश्यात्मनि चात्मानं योगी तिष्ठति योऽचल:।
पापं हन्ति पुनीतानां पदमाप्नोति सोऽजरम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो योगी ध्यान के द्वारा अपनी आत्मा को परमात्मा में स्थिर करके अचल हो जाता है, वह अपने पापों का नाश करके साधु पुरुषों को प्राप्त होने वाले अविनाशी पद को प्राप्त करता है ॥38॥
 
A yogi who, through meditation, stabilizes his soul in the Supreme Being and becomes immovable, destroys his sins and attains the imperishable position attained by holy men. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)