श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.300.24 
विशन्ति चावशा: पार्थ योगाद् योगबलान्विता:।
प्रजापतीनृषीन् देवान् महाभूतानि चेश्वरा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! योगबल से सम्पन्न पुरुष प्रजापति, ऋषि, देवता और पंचमहाभूतों के लोकों में स्वतन्त्रतापूर्वक प्रवेश करते हैं। उन्हें ऐसा करने की योग्यता प्राप्त हो जाती है। 24॥
 
Kuntinandan! Men endowed with the power of Yoga freely enter into the worlds of Prajapati, Rishi, Deity and Panchmahabhutas. They gain the ability to do so. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)