श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.300.23 
तदेव च महास्रोतो विष्टम्भयति वारण:।
तद्वद् योगबलं लब्ध्वा व्यूहते विषयान् बहून्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
परंतु जैसे हाथी उस महान जलस्रोत को रोक लेता है, अर्थात उसमें बहता नहीं, वैसे ही योगबल पाकर योगी भी उन समस्त असंख्य वस्तुओं को रोक लेता है, अर्थात उनके प्रवाह में नहीं बहता ॥23॥
 
But just as the elephant stops that great source of water, that is, he does not flow in it, similarly, after getting the great power of yoga, the yogi also blocks all those numerous objects, that is, he does not flow in their flow. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)