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mahabharat 12.300.20: महाराज! जब यही अग्नि वायु का सहयोग पाकर प्रबल हो जाती है, तो क्षण भर में सम्पूर्ण पृथ्वी को जला सकती है।   |   mahabharat अध्याय 12.300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.300.20 
स एव च यदा राजन् वह्निर्जातबल: पुन:।
समीरणगत: क्षिप्रं दहेत् कृत्स्नां महीमपि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब यही अग्नि वायु का सहयोग पाकर प्रबल हो जाती है, तो क्षण भर में सम्पूर्ण पृथ्वी को जला सकती है।
 
King! When the same fire gets the support of the wind and becomes stronger, then it can burn the entire earth instantly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)