अबलाश्च मृगा राजन् वागुरासु तथा परे।
विनश्यन्ति न संदेहस्तद्वद् योगबलादृते॥ १५॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जैसे दुर्बल मृग आदि पशु जाल में फँसकर अवश्य ही नष्ट हो जाते हैं, वैसी ही दशा योगबल से रहित मनुष्य की होती है ॥15॥
O Lord of men! Just as a weak deer and other animals fall into a trap and surely perish, so is the condition of a man devoid of the power of yoga. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥