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mahabharat 12.300.13-14: राजन! जैसे बलवान मृग जाल को तोड़कर समस्त बंधनों से मुक्त हो जाता है और निर्विघ्न मार्ग पर चला जाता है, वैसे ही योगबल से संपन्न योगी लोभजनित समस्त बंधनों को तोड़कर परम पवित्र एवं मंगलमय मार्ग को प्राप्त होता है॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 12.300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 300: सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गके स्वरूप साधन,फल और प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  12.300.13-14 
तथैव वागुरां छित्त्वा बलवन्तो यथा मृगा:।
प्राप्नुयुर्विमलं मार्गं विमुक्ता: सर्वबन्धनै:॥ १३॥
लोभजानि तथा राजन् बन्धनानि बलान्विता:।
छित्त्वा योगा: परं मार्गं गच्छन्ति विमलं शिवम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजन! जैसे बलवान मृग जाल को तोड़कर समस्त बंधनों से मुक्त हो जाता है और निर्विघ्न मार्ग पर चला जाता है, वैसे ही योगबल से संपन्न योगी लोभजनित समस्त बंधनों को तोड़कर परम पवित्र एवं मंगलमय मार्ग को प्राप्त होता है॥13-14॥
 
King! Just as a strong deer breaks the net and becomes free from all bondages and moves on to a path without any obstacles, similarly a Yogi endowed with the power of Yoga breaks all the bondages born out of greed and attains the most pure and auspicious path. ॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)