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mahabharat 12.30.7: दोनों तपस्वी पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे और सदैव की भाँति मानव-सुख भोगने लगे॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.30.7 
तावुभौ तपसोपेताववनीतलचारिणौ।
भुञ्जानौ मानुषान् भोगान् यथावत् पर्यधावताम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दोनों तपस्वी पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे और सदैव की भाँति मानव-सुख भोगने लगे॥7॥
 
Both the ascetics began roaming around the Earth and enjoying human pleasures as usual. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)