श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.30.5 
मातुलो भागिनेयश्च देवलोकादिहागतौ।
विहर्तुकामौ सम्प्रीत्या मानुषेषु पुरा विभो॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ये दोनों आपस में चाचा-भतीजे के समान हैं! हे प्रभु! बहुत समय पहले की बात है, जब ये दोनों महर्षि प्रेमपूर्वक स्वर्गलोक से मनुष्यलोक में विचरण करने के लिए यहाँ आए थे॥5॥
 
These two are like uncle and nephew to each other! O Lord! It was a long time ago that these two great sages came here lovingly from the heavenly realm to roam the human realm. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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