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श्लोक 12.30.5  |
मातुलो भागिनेयश्च देवलोकादिहागतौ।
विहर्तुकामौ सम्प्रीत्या मानुषेषु पुरा विभो॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| ये दोनों आपस में चाचा-भतीजे के समान हैं! हे प्रभु! बहुत समय पहले की बात है, जब ये दोनों महर्षि प्रेमपूर्वक स्वर्गलोक से मनुष्यलोक में विचरण करने के लिए यहाँ आए थे॥5॥ |
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| These two are like uncle and nephew to each other! O Lord! It was a long time ago that these two great sages came here lovingly from the heavenly realm to roam the human realm. ॥ 5॥ |
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