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mahabharat 12.30.25-26h: प्रभु! इसमें संदेह नहीं कि यह सुकुमारी कन्या आपकी पत्नी बनेगी, किन्तु विवाह के पश्चात् कन्या तथा अन्य सभी लोग आपका मुख बन्दर का देखने लगेंगे। बन्दर जैसा मुख आपके वास्तविक स्वरूप को छिपा देगा।॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.30.25-26h 
सुकुमारी च ते भार्या भविष्यति न संशय:।
वानरं चैव ते रूपं विवाहात् प्रभृति प्रभो॥ २५॥
संद्रक्ष्यन्ति नराश्चान्ये स्वरूपेण विनाकृतम्।
 
 
अनुवाद
प्रभु! इसमें संदेह नहीं कि यह सुकुमारी कन्या आपकी पत्नी बनेगी, किन्तु विवाह के पश्चात् कन्या तथा अन्य सभी लोग आपका मुख बन्दर का देखने लगेंगे। बन्दर जैसा मुख आपके वास्तविक स्वरूप को छिपा देगा।॥25 1/2॥
 
‘Prabhu! There is no doubt that this delicate girl will become your wife, but after the marriage the girl and everyone else will start seeing your face as that of a monkey. The monkey-like face will hide your true form.’॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)