Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.30.20-22h: तुमने स्वस्थ मन से मुझसे यह शर्त रखी थी कि ‘हम दोनों के मन में जो भी अच्छा या बुरा भाव होगा, उसे हम एक-दूसरे से कहेंगे।’ परन्तु हे ब्रह्मन्! तुमने वह प्रतिज्ञा झूठी कर दी; इसीलिए मैं तुम्हें शाप देने के लिए तैयार हो गया हूँ। | mahabharat अध्याय 12.30: महर्षि नारद और पर्वतका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृत्वा समयमव्यग्रो भवान् वै सहितो मया॥ २०॥
यो भवेद्धृदि संकल्प: शुभो वा यदि वाशुभ:।
अन्योन्यस्य स आख्येय इति तद् वै मृषा कृतम्॥ २१॥
भवता वचनं ब्रह्मंस्तस्मादेष शपाम्यहम्।
अनुवाद
तुमने स्वस्थ मन से मुझसे यह शर्त रखी थी कि ‘हम दोनों के मन में जो भी अच्छा या बुरा भाव होगा, उसे हम एक-दूसरे से कहेंगे।’ परन्तु हे ब्रह्मन्! तुमने वह प्रतिज्ञा झूठी कर दी; इसीलिए मैं तुम्हें शाप देने के लिए तैयार हो गया हूँ।
'You had made a condition with me in a healthy mind that 'whatever good or bad intentions we both have in our hearts, we will tell each other that.' But O Brahman! You made that promise false; that is why I have become ready to curse you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥