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श्लोक 12.30.16-17h  |
तस्यास्तेनोपचारेण रूपेणाप्रतिमेन च॥ १६॥
नारदं हृच्छयस्तूर्णं सहसैवाभ्यपद्यत। |
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| अनुवाद |
| उसकी सेवा और उसके अप्रतिम सौंदर्य ने नारद के हृदय में अचानक काम भावना जागृत कर दी। |
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| Her service and her matchless beauty suddenly aroused the feeling of lust in the heart of Narada. 16 1/2. |
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