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श्लोक 12.30.14-15h  |
परमं सौम्यमित्युक्तं ताभ्यां राजा शशास ताम्॥ १४॥
कन्ये विप्रावुपचर देववत् पितृवच्च ह। |
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| अनुवाद |
| तब दोनों ने कहा- ‘बहुत अच्छा।’ इसके बाद राजा ने कन्या को आदेश दिया- ‘पुत्री! तुम इन दोनों ऋषियों की देवताओं और पितरों के समान सेवा करो।’ |
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| Then both of them said- 'Very good.' After this the king ordered the girl- 'Daughter! You should serve these two sages like gods and ancestors.' |
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