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श्लोक 12.30.10-11h  |
आवां भवति वत्स्याव: कञ्चित् कालं हिताय ते॥ १०॥
यथावत् पृथिवीपाल आवयो: प्रगुणीभव। |
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| अनुवाद |
| ‘खुपाल! हम दोनों तुम्हारे हित के लिए कुछ समय तक तुम्हारे साथ रहेंगे। तुम हमारे साथ मिलजुलकर रहना।’॥10 1/2॥ |
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| ‘Khupal! Both of us will stay with you for some time for your benefit. You should live in harmony with us.’॥ 10 1/2॥ |
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