Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.3.9: यद्यपि कर्ण को असहनीय पीड़ा हो रही थी, फिर भी उसने धैर्यपूर्वक इसे सहन किया और बिना कांपे या व्यथित हुए परशुराम को अपनी गोद में बैठाए रखा।   |   mahabharat अध्याय 12.3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.3.9 
कर्णस्तु वेदनां धैर्यादसह्यां विनिगृह्य ताम्।
अकम्पयन्नव्यथयन् धारयामास भार्गवम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि कर्ण को असहनीय पीड़ा हो रही थी, फिर भी उसने धैर्यपूर्वक इसे सहन किया और बिना कांपे या व्यथित हुए परशुराम को अपनी गोद में बैठाए रखा।
 
Though Karna was experiencing unbearable pain, he endured it patiently and kept Parasurama in his lap without trembling or getting distressed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)