स तस्योरुमथासाद्य बिभेद रुधिराशन:।
न चैनमशकत् क्षेप्तुं हन्तुं वापि गुरोर्भयात्॥ ७॥
अनुवाद
रक्त चूसने वाला कीड़ा कर्ण की जांघ तक पहुंच गया और उसमें छेद कर दिया; लेकिन कर्ण अपने गुरु के जाग जाने के भय से न तो उसे फेंक सका और न ही मार सका।
The blood-sucking insect reached Karna's thigh and pierced it; but Karna could neither throw it away nor kill it due to the fear of his Guru waking up.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥