एवमुक्त: स रामेण न्यायेनोपजगाम ह।
दुर्योधनमुपागम्य कृतास्त्रोऽस्मीति चाब्रवीत्॥ ३३॥
अनुवाद
परशुराम की यह बात सुनकर कर्ण ने उन्हें विधिपूर्वक प्रणाम किया और वहाँ से लौट आया। दुर्योधन के पास पहुँचकर उसने कहा, 'मैंने सभी अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लिया है।'
On hearing Parasurama say this, Karna bowed to him in a proper manner and returned from there. Reaching Duryodhan, he said, 'I have acquired the knowledge of all the weapons.'
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि कर्णास्त्रप्राप्तिर्नाम तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कर्णको अस्त्रकी प्राप्ति नामक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥