श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.3.21 
अब्रवीद्धि स मां क्रुद्धस्तव पूर्वपितामह:।
मूत्रश्लेष्माशन: पाप निरयं प्रतिपत्स्यसे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तेरे दादा भृगु जी ने मुझे शाप देते हुए क्रोधपूर्वक कहा कि, 'हे पापी! तू मूत्र-लार आदि खाने वाला कीड़ा बनकर नरक में गिरेगा।'॥21॥
 
‘Your grandfather Bhrigu Ji, while cursing me, said to me in anger, 'O sinner! You will become a worm eating urine and saliva etc. and will fall in hell.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)