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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप
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श्लोक 11
श्लोक
12.3.11
अहोऽस्म्यशुचितां प्राप्त: किमिदं क्रियते त्वया।
कथयस्व भयं त्वक्त्वा याथातथ्यमिदं मम॥ ११॥
अनुवाद
"अरे! मैं तो अपवित्र हो गयी! यह क्या कर रहे हो? अपना भय छोड़ो और मुझे यह बात सच-सच बताओ।"
"Hey! I have become impure! What are you doing? Leave your fear and tell me the truth about this matter."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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