श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 3: कर्णको ब्रह्मास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.3.10 
यदास्य रुधिरेणाङ्गं परिस्पृष्टं भृगूद्वह:।
तदाबुद्धॺत तेजस्वी संत्रस्तश्चेदमब्रवीत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब उसका रक्त परशुरामजी के शरीर पर लग गया, तब महाबली भार्गव जाग उठे और भयभीत होकर इस प्रकार बोले-॥10॥
 
When his blood got on Parasurama's body, then the illustrious Bhaargava woke up and became frightened and spoke thus -॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)