श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.299.45 
संवाद इत्ययं श्रेष्ठ: साध्यानां परिकीर्तित:।
क्षेत्रं वै कर्मणां योनि: सद्भाव: सत्यमुच्यते॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! मैंने तुमसे हंस और लक्ष्य के बीच का संवाद इस प्रकार कहा है। यह शरीर कर्मों का मूल है और शुभ संकल्प को सत्य कहा गया है। ॥45॥
 
Yudhishthira! I have thus described to you the conversation between the swan and the goals. This body is the source of actions and good will is called truth. ॥ 45॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि हंसगीतासमाप्तौ नवनवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें हंसगीताकी समाप्ति विषयक दो सौ निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ४७ श्लोक हैं)
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas