साध्या ऊचु:
किं ब्राह्मणानां देवत्वं किं च साधुत्वमुच्यते।
असाधुत्वं च किं तेषां किमेषां मानुषं मतम्॥ ४३॥
अनुवाद
ऋषियों ने पूछा - हंस ! ब्राह्मणों का देवत्व क्या है ? उनका साधुत्व क्या माना जाता है ? उनका तप और मनुष्यत्व क्या माना जाता है ?॥ 43॥
The sages asked - Hans! What is the divinity of the Brahmins? What is considered to be their saintliness? What is considered to be their asceticism and humanity?॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥