श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.299.42 
हंस उवाच
प्राज्ञ एको रमते ब्राह्मणानां
प्राज्ञश्चैको बहुभिर्जोषमास्ते।
प्राज्ञ एको बलवान् दुर्बलोऽपि
प्राज्ञ एषां कलहं नान्ववैति॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हंस ने कहा - हे देवताओं! ब्राह्मणों में केवल बुद्धिमान पुरुष ही परम सुख का अनुभव करता है। केवल बुद्धिमान पुरुष ही अनेक लोगों के साथ रहते हुए भी मौन रहता है। केवल बुद्धिमान पुरुष ही दुर्बल होने पर भी बलवान होता है और उनमें से केवल बुद्धिमान पुरुष ही किसी से झगड़ा नहीं करता॥ 42॥
 
The swan said - O Gods! Among the Brahmins, only the wise man experiences the ultimate happiness. Only the wise man remains silent even while living with many people. Only the wise man is strong even when he is weak and only the wise man among them does not quarrel with anyone.॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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