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श्लोक 12.299.39  |
साध्या ऊचु:
केनायमावृतो लोक: केन वा न प्रकाशते।
केन त्यजति मित्राणि केन स्वर्गं न गच्छति॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| साध्वी ने पूछा - हंस ! इस जगत् को किसने आच्छादित किया है ? इसका वास्तविक स्वरूप क्यों प्रकट नहीं होता ? मनुष्य अपने मित्रों का त्याग क्यों करता है ? और किस दोष के कारण वह स्वर्ग में नहीं जाता ?॥ 39॥ |
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| Saadhy asked - Hans! Who has covered this universe? Why is its true nature not revealed? Why does a man abandon his friends? And due to which fault does he not go to heaven?॥ 39॥ |
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