| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 12.299.24  | यस्य वाङ्मनसी गुप्ते सम्यक् प्रणिहिते सदा।
वेदास्तपश्च त्यागश्च स इदं सर्वमाप्नुयात् ॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | जिसकी वाणी और मन स्थिर हैं और जो सब प्रकार से भगवान के प्रति समर्पित हैं, वह वेदाध्ययन, तप और त्याग का फल प्राप्त करता है ॥24॥ | | | | He whose speech and mind are secure and are always devoted to God in every way, he attains the fruits of study of Vedas, penance and renunciation. ॥24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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